अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में उबाल, बगदाद में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन
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Ali Khamenei Death
खामेनेई की मौत के बाद बगदाद में बड़े प्रदर्शन.
ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित.
मिडिल ईस्ट में सैन्य और राजनीतिक तनाव बढ़ा.
Tehran / मिडिल ईस्ट के इतिहास में 28 फरवरी और 1 मार्च 2026 की तारीखें बेहद अहम मानी जा रही हैं। खबर है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले में निधन हो गया। इस खबर के सामने आते ही पूरे क्षेत्र में तनाव की लहर दौड़ गई। ईरान में शोक और आक्रोश का माहौल है, तो वहीं पड़ोसी देश इराक में भी हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।
खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद इराक की राजधानी बगदाद में ईरान समर्थक समूहों और बड़ी संख्या में आम नागरिक सड़कों पर उतर आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक हजारों प्रदर्शनकारी बगदाद के ग्रीन ज़ोन की ओर बढ़ रहे हैं, जहां अमेरिकी दूतावास स्थित है। प्रदर्शनकारियों के हाथों में खामेनेई के पोस्टर और ईरान के झंडे दिखाई दिए। अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही है। कई जगहों पर प्रदर्शनकारी सुरक्षा बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश करते नजर आए, जिसके बाद इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। प्रशासन हाई अलर्ट पर है, क्योंकि आशंका है कि स्थिति कभी भी हिंसक रूप ले सकती है।
इराक लंबे समय से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का केंद्र रहा है। यहां कई सशस्त्र गुट सक्रिय हैं, जो वैचारिक और आर्थिक रूप से ईरान से जुड़े हुए हैं। खामेनेई को ये गुट अपने वैचारिक संरक्षक के रूप में देखते थे। ऐसे में उनकी मौत को वे सीधा हमला मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बगदाद में हो रहे प्रदर्शन केवल स्वतःस्फूर्त गुस्से का परिणाम नहीं, बल्कि यह ईरान की ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं, जिसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि नेतृत्व के निधन के बावजूद उनका प्रभाव कायम है।
ईरान सरकार ने खामेनेई के निधन के बाद 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है और सात दिनों के सार्वजनिक अवकाश का ऐलान किया है। सरकारी मीडिया इस घटना को देश के लिए अपूरणीय क्षति बता रहा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर हमले का कठोर बदला लेने की चेतावनी दी है। हालांकि आगे की रणनीति स्पष्ट नहीं है, लेकिन पूरे मिडिल ईस्ट में सैन्य हलचल तेज हो गई है। हवाई क्षेत्रों और सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा खालीपन पैदा कर दिया है। 1989 से सत्ता की धुरी रहे खामेनेई के जाने से ईरान के भीतर उत्तराधिकार को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। साथ ही, क्षेत्रीय समीकरणों पर भी इसका गहरा असर पड़ना तय है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका जताई जा रही है। कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा सलाह जारी कर दी है। बगदाद की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब इस बात का संकेत है कि आने वाले दिन पूरे क्षेत्र के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।